हरड़ के फायदे और नुकसान,उपयोग और इसके पेड़ की जानकारी

हरड़ एक जड़ी बूटी है जो हमारे शरीर को कई फायदे देती है वह इसके कुछ नुकसान भी है और यह हर प्रकार का घरेलू नुस्खा बनाने में काम आती है यह भारत में यह हर घर में पर मौजूद होती है और यह शरीर में वात संतुलन को बनाए रखने में सहायता करती है|

हरड़ के फायदे और नुकसान,उपयोग और इसके पेड़ की जानकारी

हरड़ का स्वाद कुछ मीठा व कड़वा होता है जो पेट साफ करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में हमारी मदद करता है और इसके पोषक तत्व कई बीमारियों को जैसे एसिडिटी,पेट दर्द,कब्ज,गैस आदि बीमारियों से राहत देते हैं

हरड़ के फायदे

दमा-हरड़ को बारीक बारीक कूटकर चिलम में भरकर उसका धूम्रपान करने से दमे का दौरा मिलता है

आंखों से पानी बहना-इसकी छाल को बरीक बारीक पीसकर आंखों पर लगाने से आंख से पानी बहना रोका जा सकता है हरड को रात भर पानी में भिगोकर सुबह उसके जल से आंखें धोने से आंखों की ज्योति बढ़ाई जा सकती है

घाव-हरड़ को फैले हुए घाव पर लगाने से घाव को बढ़ने से रोका जा सकता है

दंत रोग-हरड़ के चूर्ण का मंजन करने से दांत को साफ और निरोग बनाया जा सकता है हरड़ को नीम में मिलाकर चूसने से दांतो को मजबूत बनाया जा सकता है

बवासीर-हरड और आंवला 20 ग्राम और मिश्री 30 ग्राम इन सबको मिलाकर गुलाब जल में घोलकर इसकी गोलियां बना लेनी चाहिए इन गोलियों का सेवन करने से बवासीर को दूर किया जा सकता है

जला हुआ घाव-हरड को पानी में घिसकर और उसने अलसी का तेल मिलाकर अग्नि से जले हुए तथा गर्म जल से जले हुए स्थान पर लेप करने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है

हरड़ के उपयोग

  • हरड़ की मंजन को बढ़ाने में सहायता करती है
  • हरड को दांतो से चबाकर खाने से भूख बढ़ती है और पीसकर खाने से मल का शोधन होता है और इसे पकाकर खाने से त्रिदोष को नष्ट किया जा सकता है
  • हरड़ को भोजन के साथ खाने से बल और वृद्धि बढ़ती है जिससे इंद्रियां प्रकाशित होती हैं
  • यह वात,पित्त और कफ के रोगों को नष्ट करती है तथा मल और मूत्र से छुटकारा देती है
  • इसका भोजन के पश्चात सेवन करने से अन्न और जल के दोषों से छुटकारा पाया जा सकता है
  • हरड़ की गोली को सुबह सुबह खाली पेट लेने से हृदय रोग पेट दर्द खांसी रक्त दोष आदि दोषों से छुटकारा पाया जा सकता है

हरड़ के नुकसान

आयुर्वेद की जड़ी बूटियां हमारे लिए सबसे अच्छा ए दे मन और अच्छी होती हैं मोहिनी जड़ी बूटियों से हमें कुछ हानि नहीं पहुंचती परंतु कुछ अन्य कारण ऐसे भी हैं जिनसे हमें इन जड़ी बूटियां से नुकसान भी हो सकता है जैसे:

  1. जिन लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम हो उन लोगों को इसका उपयोग नहीं करना चाहिए
  2. 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे इसका सेवन ना करें
  3. जो लोग लंबे समय तक उपवास रखते हैं उन लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए
  4. जो लोग अत्याधिक दुबले-पतले हैं उन लोगों को इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
  5. अगर कोई व्यक्ति किसी बीमारी की विशेष दवाई का सेवन कर रहा हो तो वह अपने चिकित्सा के सलाह के अनुसार इसका सेवन करें

हरड़ के पेड़ की जानकारी

हरड़ के वृक्ष उत्तरी भारत बंगाल मुंबई मद्रास आदि स्थानों पर ज्यादा पाए जाते हैं पर भारत में हरण के पेड़ अनेक स्थानों पर पैदा हो जाते हैं मगर हिमालय और पार्श्व नाथ पहाड़ पर पैदा होने वाली हरड को सबसे अच्छी हरड माना जाता है हरड़ का पेड़ बहुत ऊंचा होता है और इस वृक्ष का पिंड लंबा और सीधा होता है

इस वृक्ष पर काले रुद्राक्ष के समान फल लगते हैं यह सूखने पर काले और छोटे छोटे होते हैं इन्हें मराठी में बाल हरड और हिंदी में जौ हरड़ कहते हैं वह हर एक ऐसी वनस्पति है जिसमें समस्त आयुर्वेद के गुण पाए जाते हैं वैज्ञानिकों ने हरड को 7 प्रकार की जातियों में विभाजित किया है विज्या,रोहिणी,पूतना,अमृता,अमया,जीवन्ती और चेतकी|

उत्तम हरड़ की पहचान

जो हरड़ नवीन घन गोल भारी और पानी में डूबने पर डूब जाती है वह अत्यंत गुण वाली और सबसे अच्छी हरड मानी जाती है वह हरड जो सभी गुणों में अच्छी होती है उसका वजन 4 तोले के करीब होता है और इसी वजन की सबसे अच्छी हरड मानी जाती है

हरड़ के यूनानी मत

यूनानी मत के अनुसार इसका कच्चा फल सबसे अच्छा होता है जो अतिसार और रक्तचाप में लाभदायक होता है और इसका पका हुआ फल पेड़ के अफारे को दूर करने में सहायता देता है तथा नेत्र रोग बवासीर और जुखाम में लाभदायक होता है हार्ड से नेत्र मस्तिष्क और मसूड़े मजबूत बनते हैं

हरड़ का प्रधान कार्य शरीर में विषैली गैसों को बाहर निकाल कर पेट को साफ करना है आयुर्वेद के अनुसार रोगों में हरड का पिसा हुआ चूर्ण गाय के दूध के साथ लेने से अधिक लाभ होता है और लगातार लगने वाली हिचकी में हरड़ का चूर्ण गर्म पानी में लेने से हिचकी को दूर किया जा सकता है

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